I’m Kiran Kheruka

Writer – Producer – Poetess

Philanthropist
God Believer
Nationalist
Cow Devotee

श्रीमती किरण खेरूका का राजस्थानी लोक कथाओं, राजस्थानी गीतों एवं भारतीय संस्कृति से विशेष लगाव रहा है।

उनका यह लगाव उनकी पुस्तकों शेखावाटी की कहानियां, वृहद अकबर-बीरबल विनोद, जीवन, दुनिया रंग रंगीली, भारत तब से अब एवं यत्र तत्र से स्पष्ट देखा जा सकता है। इनकी प्रस्तुति सातवीं पुस्तक शेखावाटी के गीत में शेखावाटी के जनजीवन एवं परंपराओं का दर्शन होता है। यह भी उनकी संग्रहणीय पुस्तक है।

7 पुस्तकों की रचना करने वाला कोई भी रचनाकार अभिनंदनीय तो होता ही है।

सभी पुस्तकें अब ऑनलाईन स्टोर पर भी उपलब्ध

श्रीमती किरण खेरूका की सभी पुस्तकें अब आप इस वेबसाइट पर खरीद सकते हैं। किताब संग्रह देखने के लिए इस बटन को क्लिक करें।

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श्रीमती किरण खेरूका का राजस्थानी लोक कथाओं, राजस्थानी गीतों एवं भारतीय संस्कृति से विशेष लगाव रहा है।

उनका यह लगाव उनकी पुस्तकों शेखावाटी की कहानियां, बृहद अकबर-बीरबल विनोद, जीवन, दुनिया रंग रंगीली, भारत तब से अब एवं यत्र तत्र से स्पष्ट देखा जा सकता है।

इनकी प्रस्तुति सातवीं पुस्तक शेखावाटी के गीत में शेखावाटी के जनजीवन एवं परंपराओं का दर्शन होता है। यह भी उनकी संग्रहणीय पुस्तक है।

7 पुस्तकों की रचना करने वाला कोई भी रचनाकार अभिनंदनीय तो होता ही है।

अब सारी किताबे खरीदने के लिए उपलब्ध हे

श्रीमती किरण खेरूकाकी सारी किताबे अब आप इस वेबसाइट पर खरदी सकते हे। किताब संग्रह देखने के लिए कृपया इस बटन को क्लिक करे।

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कोई भी व्यक्ति जो शेखावाटी (राजस्थानी) लोक कथाएं, लोक गीत व संगीत से रूबरू होना चाहे उसके लिए इस वेबसाइट का अवलोकन करना सार्थक होगा।

शेखावाटी की कहानियां

श्रीमती किरण खेरूका की यह प्रथम रचना है जिसमें शेखावाटी जन-जीवन की विभिन्न अवस्थाओं पर हास्य व्यग्यं उत्पन्न करने वाली कहानियां हैं। प्रत्येक कहानी जहां विनोद की बौछार करती है वहीं कोई मन को छूने वाला सन्देश भी देती है। भरपूर मनोरंजन करनेवाली एवं ज्ञानोदय करने वाली उनकी यह कृति लोगों द्वारा
बहुत पसंद की जाती है।

वृहद् अकबर बीरबल विनोद

श्रीमती किरण खेरूका की यह दूसरी पुस्तक है, इसमें सम्राट अकबर एवं उनके राज्य के एक रत्न बीरबल के बीच वार्तालाप एवं विभिन्न प्रसंगों के विनोद भरे किस्से हैं। उनकी यह कृति लोगों द्वारा
बहुत पसंद की जाती है।

भारत तब से अब

ईसा के हजारों साल पहले भारतीय ज्ञान और संस्कृति अपने चरम शिखर पर पहुँची हुई थी। तक्षशिला जैसा महाविद्यालय तभी संभव था जब देश में समृद्धि और शांति हो। हमारे यहॉं तो शक, हूण, पारसी, ग्रीक समय-समय पर आते रहे और
इसी संस्कृति में समाते रहे।

यत्र तत्र

ज्ञान का महाअर्णव है यह पुस्तक। पुस्तक क्या, इसे तो एक ग्रंथ ही कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं। बड़े युगों के बाद भारत एक सार्वभौम राष्ट्र बना है। अपने क्षुद्र लोभ के कारण कई प्रांत प्रधान देश हित को भूलकर सिर्फ कुर्सी की खातिर अपने देशहित को भूल गये। युवाओं को
यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिये।

स्व. महादेवजी लोयलका (नानाजी)

गृहस्थी में रहकर साधु समाज के पथ प्रदर्शक,
पत्नी के बिना, बच्चों के दादी नानी – खूब कहानियां।

स्व. श्री बजरंगलालजी खेरुका

(गुरु स्वामी चिन्मयानंद के अनन्य भक्त)

अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष – पूर्ण पुरुष रूप जीवन।

श्रीमती किरण खेरुका (निर्माता)

श्रीमती किरण खेरुका की बचपन से ही शेखावाटी की कहानियों व गीत-संगीत में रुचि रही है। इस शेखावाटी धरोहर को लुप्त होते देखकर उन्होंने सोचा कि इनका संकलन व प्रकाशन करना चाहिए और पूरी लगन व परिश्रम से कई पुस्तकों की रचना कर डाली। गीतों को संगीतबद्ध करके उनका फिल्मांकन भी किया। उनका यह कृतित्व यहां देखा जा सकता है। देश प्रेम व उनके भीतर की कवयित्री भी उनकी पुस्तकों में मुखरित हो रही है।

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