भारत तब से अब

ईसा के हजारों साल पहले भारतीय ज्ञान और संस्कृति अपने चरम शिखर पर पहुँची हुई थी| तक्षशिला जैसा महाविद्यालय तभी संभव था जब देश में समृद्धि और शांति हो| हमारे यहॉं तो शक, हूण, पारसी, ग्रीक समय-समय पर आते रहे और इसी संस्कृति में समाते रहे| आज बहुत कुछ बदला हुआ है| उस बदलाव पर प्रकाश डालती है यह कृति|

 

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