यत्र तत्र

ज्ञान का महाअर्णव है यह पुस्तक| पुस्तक क्या, इसे तो एक ग्रंथ ही कहा जाये तो अतिशयोक्ति नहीं बड़े युगों के बाद भारत एक सार्वभौम राष्ट्र बना है| अपने क्षुद्र लोभ के कारण कई प्रांत प्रधान देश हित को भूलकर सिर्फ कुर्सी की खातिर अपने देशहित को भूल गये| युवाओं को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिये|

 

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